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नमस्कार दोस्तों! आज मैं आपके लिए लेकर आया हूं ब्रह्मांड और सौरमंडल के बारे में समस्त जानकारी

ब्रह्मांड

हमारे चारों और जो चीज हम देखते हैं जैसे ग्रह आकाशगंगा सौरमंडल मंदाकिनीय आदि सभी ब्रह्मांड के अंदर हैं असल में ब्रह्मांड कितना बड़ा होता है इस बात का अंदाजा लगाना भी बहुत मुश्किल होता है

जैसे हमारा सूर्य और उसके नौ ग्रह तथा उनके उपग्रह उल्कापिंड आदि मिलकर एक सौरमंडल बनाते हैं

लगभग 100 अरब सौरमंडल मिलकर एक मंदाकिनी बनाते हैं

और लगभग 100 अरब मंदाकिनीय मिलकर एक ब्रह्मांड बनाती हैं

इस बात से हम अंदाजा लगा सकते हैं कि हमारा ब्रह्मांड कितना बड़ा है।

ब्रह्मांड का प्रसार

विकासवादी सिद्धांत के अनुसार, सभी मंदाकिनी एक दूसरे को दूर धकेल रही हैं जिसके कारण लगातार ब्रह्मांड का विस्तार होता रहता है लेकिन चुकी यह सभी दिशाओं में समान रूप से होता है तो इसको समझना काफी मुश्किल है।

इस बारे में हम सिर्फ इतना ही कह सकते हैं कि हमारा ब्रह्मांड लगातार फैल रहा है रोज नए सितारे बन रहे हैं तथा पुराने सितारे मर रहे हैं।

मंदाकिनी

जैसा कि हम सभी जानते हैं की तारों के एक विशाल समूह को मंदाकिनी कहते हैं

एक छोटी मंदाकिनी में भी लगभग एक लाख सितारे होते हैं लेकिन एक बहुत बड़ी मंदाकिनी में 30 खरब सितारे होते हैं यानी कि 3000 अरब सितारे एक बड़ी मंदाकिनी में होते हैं इस प्रकार हम अंदाजा लगा सकते हैं की एक मंदाकिनी कितनी विशाल होती है।

ब्रह्मांड में मंदाकिनी एक ईट की तरह काम करती हैं जिस प्रकार किसी मकान में ईट काम करती है उसी प्रकार एक ब्रह्मांड में एक मंदाकिनी काम करती है यानी एक बिल्डिंग ब्लॉक की तरह।

भूगोल में मंदाकिनीय को दो भागों में बांटा गया है-

  1. व्यवस्थित मंदाकिनीया
  2. अव्यवस्थित मंदाकिनीया

व्यवस्थित मंदाकिनीया

जैसा कि नाम से ही प्रतीत होता है कि इस प्रकार की मंदाकिनी बहुत ही व्यवस्थित होती है जिसमें एक निश्चित तौर पर सितारे होते हैं व्यवस्थित मंदा कमियां भी दो प्रकार की होती हैं

  1. सर्किल मंदाकिनीय
  2. दीर्घ वृत्ताकार मंदाकिनी

सर्किल मंदाकिनी

इस प्रकार की मंदाकिनीयो के मध्य में सितारों का जमावड़ा होता है।

इनकी भुजाएं वक्राकार होती हैं। लगभग 25% मंदाकिनी की भुजाएं वक्राकार होती है

इस प्रकार की मंदाकिनी में नए सितारों के बनने की संभावना ज्यादा होती है क्योंकि इसमें गैसों की मात्रा अधिक होती है।

आकाशगंगा तथा विशाल एंड्रोमेडा गैलेक्सी इस प्रकार की मंदाकिनी के सर्वश्रेष्ठ उदाहरण हैं

दीर्घ वृत्ताकार मंदाकिनीया

ज्यादातर मंदाकिनी या दीर्घ वृत्ताकार ही होती हैं। लगभग 66% मंदाकिनी या दीर्घ वृत्ताकार होती हैं

दीर्घ वृत्ताकार मंदाकिनी का आकार 2 तरीके का होता है-

1. सिमिट्रिकल

2. गोलाकार

इस प्रकार की मंदाकिनी यों का आकार थोड़ा छोटा होता है तथा कुछ मंदाकिनी का आकार तो इतना छोटा होता है कि उनको बोना की संज्ञा दी जाती है। बड़ी दीर्घ वृत्ताकार मंदाकिनी का व्यास लगभग 200000 प्रकाश वर्ष माना जाता है।

अव्यवस्थित मंदाकिनी

लगभग 10% मंदाकिनीय अव्यवस्थित मंदाकिनीय होती हैं जिसमें ज्यादातर पुराने सितारे होते हैं लेकिन कुछ सितारे नए होते हैं जोकि मंदाकिनी के बाहरी किनारों पर होते हैं तथा पुराने सितारे मंदाकिनी के बीच में स्थित होते हैं।

हमारी आकाशगंगा दुग्ध मेखला

हमारी आकाशगंगा चपटी है बिल्कुल एक डिस्क की भांति।

इसका व्यास लगभग 100000 प्रकाश वर्ष के बराबर है मतलब यह एक मध्यमवर्गीय सर्किल मंदाकिनी है।

हमारी आकाशगंगा की मोटाई 500 प्रकाश वर्ष से लेकर 2000 प्रकाश वर्ष के बराबर है आकाशगंगा में सितारे तथा धूल से भरी हुई नेबुला हैं।

हमारी दुग्ध मेकला आकाशगंगा की भुजाओं पर जुड़वा सितारे पाए जाते हैं लेकिन अभी तक शुद्ध रूप से यह नहीं बताया जा सकता कि सूर्य इसके किस हिस्से में है। या फिर यह केंद्र से कितनी दूरी पर है

हमारी आकाशगंगा की तुलना में हमारा सौरमंडल बहुत छोटा है जो आकाशगंगा का चक्कर 22 करोड़ वर्ष में लगाता है। जिसको आकाशगंगा वर्ष कहते हैं।

निहारिका

मंदाकिनी में जो धूल के बादल पाए जाते हैं उनको निहारिका कहते हैं निहारिका एक चमकदार बादल की तरह होती है जिस से सूर्य का जन्म होता है।

लगातार गैस के कणों के आपस में टकराने से परमाणु जुड़ते जाते हैं और गर्मी पैदा करते हैं जिससे एक तारा बनता है।

श्वेत वामन ड्वार्फ

सफेद रंग के सितारों का घनत्व सामान्यतः है किसी ग्रह की तुलना में बहुत अधिक होता है तथा उनका आकार बहुत ज्यादा छोटा होता है ऐसा कहा जा सकता है कि श्वेत वामन सितारे किसी समय में एक सामान्य सूर्य थे जो धीरे-धीरे नाभि के इंजन के खत्म हो जाने बने हैं। इनका आकार घटकर इतना छोटा हो गया है कि यह हमारे पृथ्वी के आकार के हो गए हैं लेकिन इनका घनत्व सूर्य के समान होता है।

दूसरे शब्दों में इनको घनत्व इतना ज्यादा होता है कि अगर इसकी तुलना हम जल से करें तो यह 1000000 गुना अधिक होता है।

इसके एक चम्मच पदार्थ में कई हजार किलो वजन हो सकता है।

इसका मतलब है कि इलेक्ट्रॉन अपने स्थान को छोड़कर नाभिक के निकट आ जाते हैं जिस कारण घनत्व इतना ज्यादा हो जाता है संभवत है गुरुत्वाकर्षण भी उतना ही अधिक हो जाता है जिस पर खड़ा होना किसी भी इंसान के बस की बात नहीं है।

कृष्ण छिद्र या न्यूट्रॉन सितारे या ब्लैक होल या कृष्ण विवर

जब एक सूर्य का आकार पृथ्वी के आकार जितना हो जाता है तो वह श्वेत वामन हो जाता है यह आप ऊपर पढ़ चुके हैं लेकिन अगर सूर्य का आकार एक फुटबॉल के जितना हो जाए तब क्या होगा वह कृष्ण छिद्र में बदल जाएगा जिसका गुरुत्वाकर्षण इतना ज्यादा होगा कि ना तो प्रकाश उसके आर पार जा सकता है और ना ही कोई और वस्तु जिस कारण यह एक काला बिंदु दिखाई पड़ता है क्योंकि ब्रह्मांड का रंग भी काला है तो यह दिखाई नहीं पड़ता हम सिर्फ इसकी गुरुत्वाकर्षण को महसूस कर सकते हैं।

सौर मंडल

सूर्य तथा 8 ग्रहों , उल्का पिंड, धूमकेतु आदि को मिलाकर सौरमंडल बनता है । सभी 8 ग्रह सूर्य की परिक्रमा करते हैं तथा सभी उपग्रह ग्रहों की परिक्रमा करते हैं । इस प्रकार पूरा सौरमंडल एक मशीन की तरह कार्य करता है ।

सूर्य के नौ ग्रह

ग्रहउपग्रहसूर्य से दूरीघनत्वव्यास
बुध057.915.434879.4
शुक्र0108.25.2412104
पृथ्वी1149.65.5112742
मंगल2227.93.936779
बृहस्पति79778.51.33139820
शनि821434687116460
अरुण2728711.2750724
वरुण1444951.6449244
प्लूटो( बौना ग्रह)5

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